Rohingya Refugees Crisis in Hindi

रोहंगिया मुस्लिम शरणार्थी संकट : कारण और तथ्य

अगर आप से पूछा जाये की आपकी राष्टीयता क्या है तो आप तुरंत कहेंगे भारतीय ,पाकिस्तानी, बंगलादेशी , नेपाली या जिस देश के भी आप निवासी है पर इस पृथ्वी पर कुछ लोग ऐसे भी है           जिन्हे ये हक़ नहीं मिला की वो अपनी राष्टीयता बता सके इन्ही लोगो का समुदाय है  रोहंगिया मुसलमान……. आज हम जानेगे कुछ ऐसे तथ्य और घटना क्रम जिन्हो ने रोहंगिया समुदाय को राष्टय विहीन कर शरणार्थी की जिंदगी जीने के लिए मज़बूर कर दिया।

Rohingya Crisis

हमारे पडोसी देश म्यांमार जिसकी  90% जनसँख्या बौद्धा धर्म को मानती है कुल आबादी 52.89 मिलियन है (2016 के अनुसार ) जिसमे  2.2 मिलियन  जनसंख्या मुस्लिम की है जिसमे से   1.1 मिलियन रोहंगिया मुस्लिम है। आपको ये बात पता होनी चाहिए की म्यांमार मुस्लिम विरोधी देश नहीं है उन्हें मुस्लिम के म्यांमार में रहने से कोई परेशानी नहीं है सिर्फ रोहंगिया मुस्लिम के रहने से परेशानी है…. तो सोचने की बात है ऐसा क्यों…….?

इसके लिए हमे इतिहास में थोड़ा पीछे जाना होगा रोहंगिया मुस्लिम म्यांमार में 12th शताब्दी से रह रहे हैI पर इन की जनसँख्या बढ़नी चालू हुई 1824 से 1948 के बीच क्योंकी ये वो दौर था जब भारत पर अंग्रेजो  का  शासन था और बंगाल जो आजका बंगलादेश  है की मुस्लिम जनसँख्या को म्यांमार जोकि उस समय का बर्मा था में बसाना शुरू किया गया था I अब क्योंकी म्यांमार  और  बर्मा  पर न सिर्फ  अंग्रेजो का शासन था बल्कि  अंग्रेज शासक  म्यांमार को  भारत का हिसा मान कर ही डिल करता था।  रोहंगिया मुस्लिम का यह पुनर्वास सभी  अंतर्राष्टीय नियम के अनुसार सही था ।

……. आज यही पुनर्वास पुरे फ़साद की जड़ है।

4th जनवरी 1948 म्यांमार को आज़ादी मिलने बाद 1983 में म्यांमार मिल्ट्री सरकार ने एक नया सिटीज़ेनशीप क़ानून बनाया जिसके तहत सिर्फ और सिर्फ  सन 1823 से पहले रहने वाले लोग ही म्यांमार के नागरिक कहलायेंगे और अगर कोई इंसान अपने आप को म्यांमार का नागरिक साबित करना चाहता है तो उसे इस बात का सरकारी दस्तावेज  दिखाना होगा की वह पिछले 50 सालों से म्यांमार में रह रहा है लेकिन रोहंगिया मुस्लिम म्यांमार पहुंचे वर्ष 1824 के बाद  और उनके पास ऐसा  कोई सरकारी दस्तावेज नहीं है जो ये  साबित  करे की वो म्यांमार में पिछले 50 साल से रह रहे हैं इसलिए तमाम  रोहंगिया मुस्लिम 1982  बने सिटीज़ेनशीप क़ानून के अनुसार गैरकानूनी तरीके से म्यांमार में रह रहे है।

यंहा आप को ये बात तो समझ आगयी होगी की म्यांमार के कानून में 1982 में किये गए बदलाव सिर्फ रोहंगिया मुसलमानो को म्यांमार से निकलने के लिए किया गया था। पर यंहा आप को रोहंगिया मुस्लिम और म्यांमार सरकार के बीचके नफरत को भी समझना होगा……इस नफरत का धर्म से जोड़ के देखना गलत है दरसल 1940 से 1948 का वो दौर जब भारत और म्यांमार आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे तब 1947 में भारत और पाकिस्तान बनाने के वक़्त और उसके बाद भी 1948 आने तक जब म्यांमार आज़ाद हुआ तब  भी म्यांमार में मौजूद रहंगिया मुस्लिम ने अपने इलाके को ईस्ट पाकिस्तान में मिलाने की पूरी कोशिश की और इसलिए म्यांमार की सरकार रोहंगिया मुस्लिम की  इस हरकत को म्यांमार की पीठ में छुरा घोपने के तौर पर देखती है इतना ही नहीं आज भी रोहंगिया मुस्लिम के ऊपर पाकिस्तान का प्रभाव  बराबर बना हुआ है। इसी को मुद्दा बना के म्यांमार की सरकार ना सिर्फ रोहंगिया मुसलमान को अपना नागरिक मानने से इंकार कर रही है बल्कि इन्हे बंगलादेश का नागरिक मानते हुए ग़ैरकानूनी प्रवासी कहना शुरू कर दिया  है ।

इतना ही नहीं ज्यादा कर रोहंगिया मुस्लिम म्यांमार के एक राज्य राखिने के समुद्रीतटिय इलाके में रहते है और सरकार की मर्ज़ी के बगैर इन्हे अपने इलाके से बाहर जाने की इजाज़त नहीं है ना ही इन्हे  वोट डालने का अधिकार है और 1982 के बाद से म्यांमार के अंदर रहने वाले बौद्ध  समुदाय और मुस्लिम के बीच में साम्प्रदायिक दंगे हो रहे है। पर 2012 में कुछ ऐसा हुआ जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया रोहंगिया मुस्लिम के कुछ लड़को ने राकीम समुदाय जो की बौद्ध समुदाय है की एक लड़की का सामूहिक बलात्कार कर दिया इसके बाद म्यंमार के  अंदर न सिर्फ दंगे होना चालू हो गए बल्कि ये दंगे अब हर साल हो रहे है

इतना ही नहीं 1982 के बाद रोहंगिया मुस्लिम के बीच आतंकवादी संगठन बन गया जो ज़मा-ते-इस्लाम और हिज़्बुल-मुजाहिदीन जैसे संगठन की सहायता से बना और इस संगठन ने म्यांमार सरकार  और पुलिस पर हमले करने शुरू कर दिए  जिसके कारण इस परेशानी ने विशाल रूप ले लिया । अक्टूबर 2016 और अगस्त 2017 इस आतंकी संगठन ने म्यांमार के आर्मी और पुलिस पे हमले किये जिससे कई आर्मी और पुलिस के जवान मारे गए इस घटना ने रोहंगिया मुस्लिम को म्यांमार के आमलोगों की नज़रो में आतंकवादी बना दिया। इसके बाद रोहंगिया मुस्लिम के ऊपर म्यांमार की आर्मी और पुलिस ने प्रतिक्रियात्मक करवाई की इस करवाई को आप सीधे सीधे नरसंहार कह सकते है क्यूंकि आर्मी ने ना सिर्फ रोहंगिया मुसलमान को मारना शुरू किया बल्कि उनकी बस्तियों को भी पूरी तरह जला दिया आज के दिन रोहंगिया मुसलमान के पास न तो म्यांमार में खाने के लिए खाना है न ही रहने के लिए घर……

पर इन सब के बीच आंग सन सू वो महिला  जिसने म्यांमार में  लोकतंत्र लाने के लिए लड़ाई लड़ी और जिसे 1991 में शांति का नावेल प्राइस मिला उन्होंने इस पुरे प्रकरण को सुचना के अभाव में हो रही एक छोटी सी गलती के रूप मे प्रस्तुत  किया। अब रोहंगिया मुसलमान अपनी जान बचा कर समुद्र के रास्ते बंगलादेश,मलेशिया,भारत पहुँच रहे जंहा कोई भी इनका स्वागत नहीं कर रहा है लगभग हर देश की ख़ुफ़िया विभाग रोहंगिया मुसलमानो से जुड़े आतंकी संगठन के कारण इन्हे खतरे के रूप में देख रहा है।

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