Padmavati : True or False in Hindi

रानी पद्मावती की कहानी : सच्ची या काल्पनिक।

padmavati की कहानी उस वक़्त की है जब राजपुताना संघर्ष और अलाउदीन खिलजी की क्रूरता अपने चरम पर थी। रानी पद्मावती को पद्मिनी के नाम से जाना जाता जाता है जो अपने सुंदरता के लिए पुरे भारत वर्ष में मशहूर थी।

padmavati: true or false
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रानी padmavati की कहानी को सच्चा साबित करने के लिए कोई तथ्य और सबूत नहीं है कुछ इतिहासकार तो इसे सिर्फ कोरी कल्पना मानते है और कुछ इतिहासकारों का मानना है की पद्मावती सिर्फ  कविता में लिखी गई एक पात्र है जिसका प्रयोग सिर्फ राजपुताना शौर्य को खंडित करने और मुग़ल शासन की चटुकारता करने के लिए रचा गया होगा पर आज भी चित्तौड़ के महल में रानी पद्मिनी की छाप दिखाई देते है। इतिहास चाहे जो भी रहा हो पर रानी पद्मावती की कहानी एक महिला की वीरता,त्याग,सम्मान,शौर्य और युद्ध की त्रासदी को दर्शाती है।

रानी padmavati सिंघल कबीले की राजकुमारी थी उनके पिता का नाम राजा गन्धर्व  एवं माता का नाम रानी चम्पावती था। padmavati के पास एक बोलने वाला तोता था जो उन्हें बहोत प्रिय था उसका नाम हिरामणि था। रानी पद्मावती बहोत सुन्दर थी जिसकी चर्चा दूर दूर तक थी उन पर लिखी कविता के अनुसार जब वो पान भी खाती थीं तो पान का लाल रंग उनके गले में नज़र आता था। इतनी सुंदरता के कारण ही उनके पिता राजा गन्धर्व ने योग्य वर की तलाश में एक स्वयंवर का आयोजन किया जिसमे उन्होंने सभी हिन्दू और राजपूत राजाओं को निमंत्रण भेजा गया।

इस स्वयंवर में भाग लेने चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह भी आये राजा रावल रतन सिंह ने मलकान सिंह को परास्त कर स्वयंवर को जीता और राजकुमारी पदमावती से विवाह किया राजा रावल रतन सिंह की पहले से १३ रानियाँ थी उस समय राजा अपनी शक्ति और राज्य विस्तार हेतु बहुविवाह किया करते थे लेकिन  राजकुमार पद्मावती से विवाह के पश्चात् राजा रावल रतन सिंह ने कोई विवाह नहीं किया।

राजा रावल रतन सिंह बहोत अच्छे शासक थे प्रजा उनसे बहोत प्रेम करती थी उन्हें कला का बहोत शौंक था देश विदेश के कलाकार, संगीतकार, कवि, कारीगर, आदि का राजा हमेशा अपने राज्य में स्वागत किया करते और पुरस्कृत किया करते थे। राजा के दरबार में एक बहोत प्रसिद्ध गायक ‘राघव चेतक’ भी थे गायकी के आलावा उसे काला जादू और तंत्र-मंत्र का भी ज्ञान था जिसका प्रयोग वह अपने दुश्मनों के खात्मे के लिए करता था दरबार में किसी को राघव चेतक की काले जादू के बारे में जानकारी नहीं थी

एक दिन राघव चेतक राजा रावल रतन सिंह पर ही काले जादू का प्रयोग करना चाहता था जिसकी जानकारी राजा को लग गई। राजा ने तुरंत दरबार बुला के राघव चेतक का मुँह कला कर पुरे राज्य में घुमाते हुए राज्य से बहिस्कृत करने का आदेश दिया। इस कड़ी सजा ने राघव चेतन के मन में राजा के लिए नफ़रत और गुस्सा भर दिया और उसने इस अपमान का बदला लेने की ठान ली ।

राघव चेतन ये जनता था की वो अकेले बदला नहीं ले सकता उसे एक ऐसे साथी की तलाश थी जो राजा रावल रतन सिंह से जादा ताकतवर हो इस तलाश में उसने दिल्ली की तरफ कूच किया उस समय दिल्ली पर अलाउद्दीन खिलजी का शासन था जो क्रूर भी था अलाउद्दीन खिलजी से मिलने के लिए राघव चेतक ने एक चाल  चली राघव चेतक ये जानता था की अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली के पास जंगल में शिकार के लिए आता है तो राघव ने भी उसी जंगल में डेरा जमा लिया और खिलजी का इंतज़ार करने लगा राघव खिलजी को लुभाने के लिए जंगल में हर रोज़ बांसुरी की मधुर धुन बजाय करता था एक दिन खिलजी जंगल में शिकार के लिए आया और बांसुरी की धुन सुनकर कर बांसुरी बजाने वाले से मिलने की इच्छा जताई।

खिलजी के सैनिक ने राघव चेतक को ढूढ़ कर अलाउद्दीन खिलजी के सामने पेश किया खिलजी ने राघव की कला की तारीफ़ करते हुए उसे दिल्ली के दरबार में आने को कहा। चालक राघव ने इस मौके का फायदा उठाते हुये खिलजी से कहा की आप के पास तो सुन्दर से सुन्दर अनोमल चीजे है फिर मुझे क्यों दराबर में भुला रहे है। खिलजी राघव की पूरी बात समझ नहीं पाए और अपनी बात को समझने को कहा फिर राघव अपनी पूरी कहानी बताता है और साथ की रानी padmavati की सुंदरता का भी खूब बखान करता है ये सुन कर अलउद्दीन खिलजी उत्तेजित हो जाता है और चित्तौड़ पर चढाई करने का विचार कर लेता है खिलजी रानी को अपने हरम में रखने की सोचने लगता है।

अलाउद्दीन खिलजी चितौड़ पर चढाई कर देता है पर चित्तोड़ की सुरक्षा देख कर हैरान रह जाता है और अपने सैनिकों को रुकने का आदेश देकर राजा रावल रतन सिंह के पास सन्देश भिजवाता है की वह रानी पद्मावती को एक बहन के रूप में एक बार देखना चाहता है ।

राजपूत राजा के के लिए यह अपमान और गुस्से की बात थी की कोई और उसकी रानी को देखने की इच्छा रखता है क्यों रानियों को हमेशा पर्दे में सामान के साथ रखा जाता था पर खिलजी बहोत ही ताकतवर था उसके आदेश और सन्देश की तोहिन करना राज्य की प्रजा के लिए बहोत घातक हो सकता था ।

सभी दरबारियों और रानी से विचार करके राजा रावल रतन सिंह खिलजी के बात एक शर्त पर मन लेते है की वो रानी को सीधे नहीं देख सकते सिर्फ आईने में उसकी प्रतिबिम्ब देख सकते है अलाउद्दीन खिलजी भी इस बात के लिए राजी हो जाता है।

सभी तैयारी हो जाने के बाद अलाउद्दीन खिलजी अपने अंगरक्षकों के साथ चित्तोड़ में प्रवेश करता है और आईने में उभर रही रानी padmavati का प्रतिबिम्ब देख कर मदहोश हो जाता है और मन में रानी को पाने की ठान लेता है। खिलजी अपने शिविर में वापस लौट आत है और साथ में राजा रावल रतन सिंह भी उसे छोड़ने शिविर तक आते है इस मौके का फायदा उठाके खिलजी राजा रतन सिंह को कैद कर रानी पद्मावती के बदले उसे छोड़ने की शर्त रख देता है।

चौहान राजपूत सेनापति  गौरा और बादल रानी padmavati के साथ मिलकर राजा रतन सिंह को छुड़ाने की योजना बनाते है इस योजना के तहत वो अलाउद्दीन खिलजी को एक सन्देश भेजते है जिसके अनुसार रानी पद्मावती उसके पास आने के लिए तैयार है और सुबह 150 पालकियां खिलजी की शिविर की तरफ चल देती है जँहा राजा रतन सिंह को रख गया था इतनी पालकियों को देख खिलजी की सेना खुश हो जाता है और राजा रतन सिंह का मज़ाक उड़ने लगते है पर जैसी ही पालकी सैनिकों के पास आती है उसमे से राजपूत सैनिक बाहर निकल कर अपने राजा को छोड़ने लगते है इस लड़ाई में जनरल गौरा पराक्रम के साथ लड़ता हुआ शहीद हो जाता है लेकिन सेनापति बादल बहादुरी के साथ लड़ते हुए राजा रावल रतन सिंह को खिलजी के घोड़े में ही चित्तोड़ तक सही सलामत पहुंचा देता है।

इस हार से खिलजी बहोत गुस्से में आ जाता है और तुरंत चित्तोड़ पर चढाई करने के आदेश दे देता है, पर चित्तोड़ के सुरक्षा इतनी मजबूत थी की वो किले में प्रवेश नहीं कर पता पर खिलजी एक बहोत ताकतवर दस्ते को किले के चारो तरफ घेरा बंदी के लिए लगा देता है कुछ दिनों में ही किले के अंदर राज्य के प्रजा के लिए भोजन की कमी होने लगती है जिसके कारण राजा रतन सिंह किले के द्वार को खोलने का आदेश देते है और सैनिकों को मरते दम तक लड़ने का आह्वाहन करते हैं। पर राजपूत सेना इतने बड़े सेना के सामने जादा देर तक टिक नहीं पाती है।

Padmavati : war
Padmavati : war

रानी पद्मावती भी निराश हो जाती है और उन्हें खिलजी सेना के जीत के बाद चित्तोड़ की महिलों और खुद पर होने वाले जुल्म और अपमान के बारे में सोचने लगती है इस बीच राजा रतन सिंह खुद लड़ाई के लिए कुच करते है लम्बी लड़ाई के बाद राजा रतन सिंह शहीद हो जाते है ये सन्देश रानी को मिलता है की राजा शहीद हो गए है जिसके बाद रानी और अन्य महिलाएँ अपने मान को बचाने के लिए जौहर (जौहर वो परम्परा थी जिसमे औरते अपने मान सामन की रक्षा के लिए अपने शरीर को अग्नि के हवाले कर देती है ) की सोचती है।

padmavati : true or false
जौहर

रानी पद्मावती और अन्य महिलाओं की लिए एक बड़ी अग्नि कुंड बनाई जाती है जिसमे रानी पद्मावती और सभी महिलाएं खिलजी सेना के किले में प्रवेश करते ही कूद जाती है। बचे हुए सैनिक भी अंतिम साँस तक लड़ते है और शहीद हो जाते है ।

किले को जितने के बाद जब अलाउद्दीन खिलजी किले में प्रवेश करता है तो उसे सिर्फ अग्नि कुंड में रानी पद्मावती और अन्य महिलाओं की राख मिलती है। खिलजी निराश और खाली हाँथ लिए वापस दिल्ली लौट जाता है।

ये थी महान रानी पद्मावती की कहानी जिनकी की कुरबानी राजपुताना शौर्य गाथा में अमर हो गयी।

ये कहानी सच्ची है या महज़ कल्पना इन दोनों बातों के लिए बहोत से तथ्य दिए जाते है जैसे खिलजी का चित्तौड़ पर आक्रमण के सबुत सिर्फ उस वक़्त आमिर खुसरो द्वारा रचित ‘ खाजा इनउल फुतुह ‘ में है जिसके अनुसार ये सिर्फ एक सामान्य सैन्य अभियान था नये बने राजा रतन सिंह को काबू में करने के लिए। ऐसे ही कई तथ्य कहे जाते है की रानी पद्मावती सिर्फ कल्पना है पर ये भी सच है एक कवी मालिक मोहम्मद जायसी ने एक कविता लिखी जिसमे सबसे पहले अलाउदीन खिलजी का रानी पद्मावती को देख कर मोहित होने वाली बात कही गयी ये कविता अवधी भाषा में है ।

सच जो भी हो पर ये कहानी भारतीय शौर्य और अपने मान के लिए किये बलिदान को की अमर गाथा  है।

 

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