Lingayat (लिंगायत) Community And politics in Hindi

कौन है Lingayat (लिंगायत) और क्यों होना चाहते है हिन्दू धर्म से अलग..

lingayat community (pic:republicreports.com)
lingayat community (pic:republicreports.com)

चुनाव के नज़िद आते ही सभी राजनितिक पार्टी किसी विशेष समुदाय को निशाना बना के अपने मास्टर स्ट्रोक खेलने लगती है इस बार सिद्धारमैया सरकार ने भी Lingayat (लिंगायत) समुदाय जो अभी तक हिन्दू समुदाय का ही एक अंग है के ऊपर अपना मास्टर स्ट्रोक खेला है सिद्धारमैया सरकार जो की कांग्रेस पार्टी से है ने लिंगायत समुदाय को हिन्दू धर्म से अलग धर्म की मान्यता देते हुए एक प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा है जिसके अनुसार लिंगायत समुदाय को हिन्दू से अलग धर्म की मान्यता मांगी है।

कर्नाटक सरकार जहाँ इस फैसले को लेकर अपनी पीठ ठोक रही है वंही भाजपा और अन्य दल इस फैसले को हिन्दू विरोधी कह कर आलोचना कर रहे है।

भाजपा और अन्य दल का आरोप है की सिद्धारमैया सरकार अपनी राजनितिक लाभ के लिए ये सब कर रही है।

…….तो ये जानना बहोत जरुरी है की Lingayat (लिंगायत) कौन है और इस पर इतनी राजनिति क्यों….?

कौन है Lingayat  (लिंगायत) समुदाय….?

12 सताब्दी में गुरु बासवन्ना ने इस समुदाय की स्थापना की थी। कर्नाटक में 12 सदी के आस-पास राजा बैजल दुवतिय का शासन था उस समय जातीवाद अपने चरम पर था ब्राह्मणवाद या कहें उच्च जाती के लोगो का दबदबा था निचली जाती के लोगो परेशान हो चुके थे इसी सदी में एक ब्राह्मण परिवार में गुरु बासवन्ना का जन्म हुआ जो एक धर्मसुधारक के रूप में देखे जाते है जिन्होंने एक ही धर्म में विभिन्न जातियों के बीच के अंतर को नकारते हुए अपने कई विचरों को प्रगट किया जिसमे से एक विचार के अनुसार “आत्मा की कोई जाती नहीं होती ना ही को रीतिरिवाज होती है” उनके विचरों से प्रभावित लोगो का एक समुदाय बना जिसे Lingayat (लिंगायत) समुदाय कहा जाता है।

basavanna (pic: udayavani.com)
basavanna (pic: udayavani.com)

Lingayat (लिंगायत) समुदाय जातिवाद, मूर्तिपूजा के खिलाफ हैं Lingayat (लिंगायत) समुदाय मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार नहीं करती बल्कि दफनाती है और लिंगायत समुदाय लोगो का कर्म के आधार पर वर्गीकरण करती है।

वीरशैव से कैसे अलग है लिंगायत……?

Lingayat (लिंगायत) समुदाय को भारत के प्रचीन समुदाय से मन जाता है और ये शिव की आराधना करते है वंही वीरशैव समुदाय का शाब्दिक मतलब ही शिव का परमभक्त होता है इस कारण यह माना जाता है की वीरशैव और Lingayat (लिंगायत) एक ही है।

लेकिन लिंगायत अपने को वीरशैव से अलग मानते है उनका कहना है की वीरशैव का अस्तित्व गुरु बासवन्ना से पहले का है तो वो एक कैसे हो सकते है।

लिंगायतसमुदाय का ये भी कहना है की Lingayat (लिंगायत) शिव जी की उपासना नहीं करते वो सिर्फ शरीर में इष्टलिंग को धारण करते है जोकि अण्डाकार आकृति के होते है जिसे एक धागे की मदद से धारण किया जाता है जबकि वीरशैव शिव जी की आराधना करते है।

राजनीतीक सक्रियता….

लिंगायत समाज के लोग राजनीती में भी बहोत सक्रीय रहे है वो समय समय पर भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों का साथ देते है। उन्हें जिस दल से अपनी बेहतरी नज़र आती है वो उसी के साथ हो लेते है।

yeddyurappa and siddaramaiah (pic: deccanchronicle.com)
yeddyurappa and siddaramaiah (pic: deccanchronicle.com)

सबसे पहले उन्होंने रामकृष्ण हेगड़े को अपना समर्थन दिया था हेगड़े उस समय जनता दल के नेता थे। पर 1989 में Lingayat (लिंगायत) समाज का हेगड़े से मोह भंग होगया और वो कांग्रेस में चले गए इसका फायदा भी कांग्रेस को मिला और वो उनकी मदद से सरकार बनाने में सफल रहे।

कांग्रेस के तरफ से मुख्यमंत्री वीरेंदर पाटिल को बनाया गया जिनके साथ Lingayat लिंगायत समुदाय की अच्छी बनती भी थी पर कुछ कारण से पाटिल को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी जिसे नाराज़ हो कर Lingayat (लिंगायत) ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया।

जब हेगड़े जनता दल को छोड़ जनता दल यूनाइटेड के साथ हो लिए तब फिर से Lingayat (लिंगायत)   हेगड़े के साथ ही खड़े होगये । जनता दल यूनाइटेड ने लोकसभा चुनाव में अटल विहार वाजपई जी का साथ दिया।

हेगड़े जी के निधन के बाद Lingayat (लिंगायत) फिर कांग्रेस की तरफ हो सकते थे लेकिन भाजपा ने यदुरप्पा को मुख्यमंत्री बना दिया इस लिए Lingayat (लिंगायत) भाजपा के साथ ही रहे। पर बाद में यदुरप्पा को कुर्सी छोड़नी पड़ी जिसके कारण Lingayat (लिंगायत) भाजपा से नाराज़ हो के कॉग्रेस के खेमे में चले गए। जिसके कारण 2013 के चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

अब चूँकि फिर से चुनाव का मौहाल है और भाजपा ने यदुरप्पा को अपना नेता चुन लिया है और Lingayat (लिंगायत) यदुरप्पा को पसंद भी करते है तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दल को लिंगायत समुदाय के दूर होने का डर सताने लगा है इस लिए सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म की मान्यता का मास्टर स्ट्रोक खेला है।

लेकिन विरोध ये भी है की वीरशैव समुदाय का कहना है की अलग धर्म को “वीरशैव लिंगायत” कहा जाये ना कि Lingayat (लिंगायत) धर्म।

 

ये लेख आप को केसा लगा कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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