Dollar कैसे बन गई world Currency in Hindi

डॉलर कैसे बन गई वर्ल्ड करेंसी

Dollar को World Currency माना जाता है अगर आपने कभी भी इंटरनेशनल Transaction किया है तो आप को पता होगा की आप चाहे किसी देश में हों और किसी भी अन्य देश को पैसे भेज रहे हों आप को Dollar का सहारा लेना होगा आप के सारे इंटरनेशनल Transaction सिर्फ Dollar के जरिये ही सम्भव और आसन है.

और किसी देश के अर्थव्यवस्था को इस आधार पर आंका जाता है की उस देश के फॉरेन रिज़र्व में कितना Dollar है. पर आज कल कुछ  Transaction यूरो और जापानी येन में भी किया जाता है. लेकिन आज भी दुनिया में होने वाले 90% Transaction Dollar में ही होते है .

Dollar
Dollar

How Dollar Became World Currency (Dollar कैसे बन गई वर्ल्ड करेंसी)…?

Dollar की वर्ल्ड करेंसी में तबदील होने की कहानी शुरू होती है सन 1944 में जब Second World War वार अपने अंतिम चरण में थी इस समय सारे देशों की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुकी थी और विश्व के सामने ये समस्या आन पड़ी थी की Second World War से तबाह हुए देश का पुनर्निर्माण कैसे किया जाये.

इस समस्या को हल करने के लिए जुलाई 1944 में अमेरिका में एक सभा बुलाई गई जिसमे 44 मित्र देशो के 730 डेलीगेट्स ने भाग लिया और इस अधिवेशन को पूरी दुनिया “BRETTON WOODS CONFERENCE”  के नाम से जानती है .

BRETTON WOODS CONFERENCE
BRETTON WOODS CONFERENCE

इसी अधिवेशन के दौरान IMF (इंटरनेशनल मोनेट्री फण्ड) का गठन हुआ और वर्ल्ड बैंक बनाने का फैसला लिया गया ये फैसला अमेरिका को और ताकतवर बनाने वाला था क्यूंकि Second World War के बाद भी अमेरिका को आर्थिक रूप से सब से कम नुकसान हुआ था साथ ही अमेरिकन अर्थव्यवस्था Second World War के बाद भी मजबूती थी साथ ही Dollar एक मात्र करेंसी थी जो स्थिर और विश्वसनीय थी.

इसलिए वर्ल्ड बैंक और IMF  में होने वाली सारे Transaction के लिए Dollar को मान्यता दे दी गई और Dollar को वर्ल्ड रिज़र्व करेंसी घोषित कर दिया गया.

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इसके बदले में अमेरिका ने वर्ल्ड बैंक से ये वादा किया की न सिर्फ वो अपने Dollar के प्रिंटिंग को सीमित रखेगा  साथ ही कोई भी देश 35 Dollar प्रति औंस के बदले अपना Gold अमेरिका से एक्सचेंज कर सकता है उस समय और आज भी अमेरिका के पास सोने का सब से बड़ा गोल्ड रिज़र्व है इसलिए अमेरिका के अलावा कोई और देश ये काम नहीं कर सकता था . इस एक्सचेंज सिस्टम को “BRETTON WOODS SYSTEM” के नाम से जाना जाता है .

1 नवम्बर 1955 से 30 अप्रेल 1975 वियेतनाम युद्ध के दौरान कई देश को ये पता चला की अमेरिका डॉलर की प्रिंटिंग अपने जरूरत के हिसाब से कर रहा है साथ ही अमेरिका के फ़ेडरल रिज़र्व ने अंपने Dollar प्रिंटिंग प्रेस का वर्ल्ड बैंक एवं IMF से ओडिट करवाने से भी मना कर दिया और इसके साथ ही डॉलर की वल्वुय गिरने लगी.

इसी समय फ़्रांस ने अमेरिका से Dollar के बदले अपना गोल्ड वापस माँगा तो अमेरिकन राष्टपति रिचर्ड निक्सन ने फ़्रांस को गोल्ड देने से मना कर दिया साथ की “BRETTON WOODS SYSTEM” को अस्थाई रूप से बंद कर दिया. जिसे सभी देशों के लिए अमेरिकन डॉलर की वल्वुय शून्य होगी.

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सभी देशों के पास Dollar की बहोत बड़ी मात्र रिज़र्व के रूप में थी साथ ही अब अमेरिका के तरह चाइना और रूस के पास भी नुक्लियर हथियार थे इस लिए अमेरिका के ऊपर Dollar के बदले गोल्ड को वापस करने का दबाव बढता जा रहा था.

इस समस्या को हल करने के लये अमेरिका के प्रसीडेंट रिचर्ड निक्सन ने सउदी अरबा से एक समझोता किया जिसके अनुसार सउदी अरब अपने तेल के बदले सिर्फ अमेरिकन Dollar और बांड ही लेगा जिसके बदले अमेरिका सउदी आयल फिल्ड की सुरक्षा करेगा .

oil field
oil field

सउदी अरब के पास कोई और रास्ता नहीं था क्यूंकि सउदी अरब इजराइल से युद्ध हार चूका था और वो अमेरिका के गुस्से का शिकार नहीं होना चाहता था. इस लिए सउदी अरब ने अमेरिका की बात को मान लिया . इस समझोते के बाद जन्म हुआ PETRODOLLAR का जिसने अमेरिका को और ताकतवर बना दिया साथ ही सभी अरब देश के अमेरिका के साथ हुए समझौते के कारण Dollar की वल्वुय फिर से मजबूत हो गई .

1973 में अरब देशों का इजराइल के साथ फिर से युद्ध हुआ तब अमेरिका ने अरब देशों का साथ न देकर इजराइल का साथ दिया जिसेके कारण अरब देश अमेरिका से नाराज़ हो गये लेकिन फिर भी उन्होंने डॉलर के बदले तेल देना जारी रखा इस मुख्य कारण अमेरिका द्वारा गदाफी और सद्दाम हुसेन पर किया गया हमला है जिसका डर हर अरब देश को है.

ये था वो पूरा घटनाक्रम जिसने डॉलर को वर्ल्ड करेंसी बना दिया आप को ये आर्टिकल केसा लागा कमेंट बॉक्स में जरुर बतायेगा आप के सुझावों और विचार हमारे लिए बहुमूल्य है.

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