सीरिया पर हमले से तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो चुकी है…?

अमेरिका ने 13 अप्रेल 2018 को सीरिया पर हवाई हमला कर दिया है कारण है सीरिया की आतंरिक लड़ाई के बीच हुआ केमिकल हथियार का इस्तेमाल पर इस हवाई हमले ने विश्व के सबसे शक्तिशाली देशों को दो भाग में बाँट दिया है एक तरफ अमेरिका, फ़्रांस और ब्रिटेन है तो दूसरी तरफ रूस, चीन और उसके सहयोगी देश है इन शक्तिशाली देशों के आपसी टकराव के कारण ये अंदाजा लगाया जा रहा है सीरिया को लेकर अगर बात नहीं बनी तो ये तना-तनी विश्व युद्ध में बदल सकती है.

ये पहली बार नहीं है की अमेरिका ने Siriya (सीरिया) पर रसायनिक हथियार को ले कर हमला किया है इससे पहले भी 2014 में अमेरिका ने सीरिया पर हमला किया था पर उस समय थोड़े विरोध के बाद मामला शांत होगया था पर इस बार दोनों पक्ष एक दुसरे को धमकी दे रहे है.

पुरे विवाद की जड़ है सीरिया पर अपना नियंत्रण कायम करना आइये जानते है क्यूँ है सीरिया इतना अशांत और क्यूँ विश्व शक्ति दो भागों में बट गई है.

क्या है सीरिया विवाद

सीरिया युद्ध के बारे में जाने से पहले ये दो बातें जान लीजिये पहला की ये पूरा युद्ध सीरिया की जमीन और उसके संसाधन के लिए लड़ा जा रहा है न की सीरिया के लोगो के लिए क्यूँ की अगर ये लोगो के लिए लड़ा जाता तो अभी तक लाखो सीरिया निवासी मरते नहीं और ना ही वो अपना देश छोड़ अन्य देश में शरणार्थी का जीवन बिताते.

दूसरी बात की ये पूरा युद्ध “शायद” शब्द पर लड़ा जा रहा है क्यूंकि किसी के पास कोई साबुत नहीं है की किसने क्या किया और क्यूँ किया. इस आर्टिकल में भी जितने भी तथ्य रखे गए हैं वो सिर्फ शायद पर आधारित है क्यूँ किसी चीज का कोई साबुत किसी के पास नहीं है और ना ही अपने किये गए कृत्य को मानने को तेयार है.

सीरिया की युद्ध की शुरुवात हुई सीरिया की शहर दरा में जन्हा Siriya (सीरिया) के लोगो ने democracy की मांग को ले कर सीरिया के प्रेसिडेंट “बशर-अल-असाद” के खिलाफ प्रदर्शन किया जिसे ख़त्म करने के लिए बशर-अल-असाद ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवा दीं.

जिसके कारण सीरिया का आक्रोश बढता गया और जुलाई 2011 आते आते इन प्रदर्शनकारियों ने हथियार उठा लिए साथ ही सीरिया की आर्मी भी दो भागो में बट गई एक हिस्सा प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद के साथ था और दुसरे हिस्से ने  प्रदर्शनकारियों के साथ मिल कर एक ग्रुप बना लिया जिसे “सीरियन रेबेल्स” नाम से जाना जाता है .

समस्या तब हो गई जब सीरियन रेबेल्स ग्रुप से कई आतंकी संगठन भी जुड़ गए और सीरियन रेबेल्स ग्रुप को हथियार और पैसे मुहैया कराने लगे कहा तो ये भी जाता है की प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद ने सीरियाई जेल में बंद कई आतंकवादीयों को भी रिहा किया ताकि वे सीरियन रेबेल्स ग्रुप से जुड़ जाएँ ताकि अमेरिका इस ग्रुप की मदद न करे.

2012 आते आते अल-कायदा ने भी सीरियन रेबेल्स ग्रुप से जुड़ते हुए अपना एक संगठन जब्हत-अल-नुसरा नाम से सीरिया में चालू कर दिया साथ ही सिरिया के उत्तरी भाग के कुर्दिस लड़ाके जो की कुर्दिस्तान की मांग कर रहे थे वो भी सीरियन रेबेल्स ग्रुप से जुड़ गए और प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद के खिलाफ युद्ध लड़ने लगे.

इस ग्रुप को सउदी अरब ने फंडिंग करना चालू कर दिया जिसके विरोध में ईरान ने प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद की मदद की और उन्हें पैसे और हथियार की मदद देना चालू कर दिया साथ ही ईरान ने अपनी आतंकी संगठन हिज़बूल्लाह को भी सीरिया भेज दिया .

इस युद्ध में अगस्त 2013 में एक नया मोड़ आया जब ये पता चाल की प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद ने Siriya (सीरिया) में रासायनिक हथियार प्रयोग किया है इस के विरोध में अमेरिका भी इस युद्ध में कूद पड़ा और उसने सीरिया के कई ठिकानो पर हवाई हमले कर दिए साथ ही अमेरिका ने सीरियन रेबेल्स ग्रुप और उसे जुड़े कई संगठन को प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद के खिलाफ हथियार देना चालू कर दिया.

प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद कमज़ोर पड़ते जा रहे थे और उन्होंने ने रुस से मदद मांगी अब रूस भी प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद को मदद के बहाने इस युद्ध में कूद पड़ा इस तरह विश्व के सबसे ताकतवर देश दो भाग में बंट गए.

लेकिन जब 2016 में डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के नये राष्टपति बने तो लगा की इस युद्ध का कोई समाधान निकल सकेगा क्यूंकि डोनाल्ड ट्रम्प सीरिया के प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद को हटाना नहीं चाहते थे.

7 अप्रेल 2018 को फिर से वही खबर आई की सीरिया के प्रेसिडेंट बशर-अल-असाद ने विद्रोहियों को भगाने के लिए रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया है जिसके बाद वो तस्वीरे सामने आई जिसमे सीरिया की आम जनता और बच्चे इस हमले की वजह से मरे जा रहे है.

इस घटना के बाद अमेरिका ने 13 अप्रेल 2018 को फिर से सीरिया के रासायनिक गोदामो और कई संदिग्ध ठिकानो पर 100 से जादा मिशाइलों से हवाई हमले किये. जिसके विरोध में रूस सामने आ गया है और इस हमले की निंदा करते हुए चेतावनी दी है की ये हमले बंद नहीं हुए तो वो जवाबी करवाई करेगा.

पुरे विश्व में सीरिया में हो रहे टकराव से डर का मौहोल है कई जानकारों का मानना है की अगर रूस सीरिया के पक्ष में अमेरिकन हमले के विरोध में कोई कदम उठता है तो ये युद्ध विश्व युद्ध में बदल सकता है.

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